समझौते के तहत ईरान परमाणु कार्यक्रम खत्म करने और आतंकवादी समूहों को फंडिंग बंद करने पर सहमत"

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📅 june 12, 2026 • 11:00 PM

"एक व्हाइट हाउस अधिकारी के अनुसार, ईरान अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते के तहत अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने, परमाणु सामग्री को नष्ट करने और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कुछ शर्तों को मानने पर सहमत हुआ है।"

"अधिकारी ने कहा कि यह एक 'परफॉर्मेंस-बेस्ड डील' होगी, जिसमें ईरान की ओर से किए गए वादों को पूरा करने के बाद ही उसे किसी तरह की राहत या लाभ मिलेगा।"

अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: परमाणु कार्यक्रम खत्म करने और शर्तें मानने की बात

अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि प्रस्तावित अमेरिका-ईरान समझौते के तहत ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना होगा और कुछ सख्त शर्तों को पूरा करने के बाद ही आर्थिक राहत मिल सकेगी।

क्या है प्रस्तावित समझौता?

अधिकारी के अनुसार यह समझौता "प्रदर्शन आधारित डील" होगा। इसका मतलब है कि ईरान को पहले अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा, उसके बाद ही उसे किसी तरह की वित्तीय सुविधा या राहत दी जाएगी।

अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि समझौते के तहत ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करना, परमाणु सामग्री को नष्ट करना और उससे जुड़ी गतिविधियों को खत्म करना होगा।

आतंकवादी समूहों को फंडिंग रोकने की शर्त

रिपोर्ट के अनुसार, समझौते में ईरान से क्षेत्रीय समूहों को मिलने वाले वित्तीय समर्थन को रोकने की मांग भी शामिल है।

अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान को अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी, तभी उसके जमे हुए फंड को जारी करने पर विचार किया जाएगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी शर्त

अधिकारी के अनुसार, समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की बात भी शामिल है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

दोनों पक्षों में मतभेद जारी

हालांकि इस प्रस्तावित समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया में आई कुछ जानकारियों को गलत बताया है।

इस पूरे मामले पर अंतिम स्थिति आधिकारिक बातचीत और समझौते की शर्तों के स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगी।

निष्कर्ष

अगर यह समझौता लागू होता है, तो इसका असर अमेरिका-ईरान संबंधों के साथ-साथ वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।